आज का युवा और ITI: कौशल से आत्मनिर्भर भारत की ओर by H L Sharma
“हुनर ही असली पहचान है, और ITI उस हुनर की पहली सीढ़ी।”
भारत आज विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है। हमारे देश की लगभग 65% जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यह जनशक्ति यदि सही दिशा में आगे बढ़े, तो भारत न केवल अपनी बेरोजगारी की समस्या को कम कर सकता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति बन सकता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि डिग्रीधारी युवाओं की संख्या बढ़ रही है, जबकि उद्योगों को आज भी कुशल (Skilled) मानव संसाधन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) युवाओं के लिए एक सशक्त विकल्प बनकर उभर रहे हैं, जो उन्हें कम समय में रोजगारोन्मुख कौशल प्रदान करते हैं।
उद्योगों की मांग और कौशल का महत्व - आज का युग “डिग्री” नहीं बल्कि “कौशल” का है। उद्योगों को ऐसे युवाओं की आवश्यकता होती है जो सीधे कार्यस्थल पर काम कर सकें। बिजली, ऑटोमोबाइल, निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, HVAC (Refrigeration & AC), वेल्डिंग, फिटर, प्लम्बर जैसे क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की भारी मांग है। ITI इन सभी क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर युवाओं को Job Ready बनाता है। यदि युवा केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रहते हैं, तो रोजगार पाना कठिन हो जाता है। वहीं ITI से प्रशिक्षित युवा कम समय में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं या स्वयं का रोजगार शुरू कर सकते हैं।
दूसरे देशों से सीख - जर्मनी, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने कौशल विकास को अपनी प्राथमिकता बनाया है। जर्मनी का “Dual System” मॉडल विश्वभर में प्रसिद्ध है, जिसमें शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी कारण ये देश आज औद्योगिक रूप से अत्यंत विकसित हैं। भारत भी यदि ITI और कौशल शिक्षा को मजबूत बनाता है, तो वह “Make in India” और “Skill India” के सपनों को साकार कर सकता है।
बेरोजगारी की चुनौती और समाधान - भारत में एक बड़ी समस्या “शिक्षित बेरोजगारी” है। लाखों युवा डिग्री लेकर भी नौकरी के लिए भटक रहे हैं। ITI इस समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है: कम समय में कौशल आधारित प्रशिक्षण, उद्योगों के अनुरूप पाठ्यक्रम, स्वरोजगार के अवसर, कम लागत में शिक्षा। इससे युवा न केवल रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने वाले उद्यमी बन सकते हैं।
ITI के प्रमुख लाभ - रोजगारोन्मुख शिक्षा – प्रशिक्षण सीधे नौकरी से जुड़ा होता है, कम समय में कोर्स – 6 महीने से 2 वर्ष तक, व्यावहारिक ज्ञान – 70% तक प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, स्वरोजगार के अवसर – अपना व्यवसाय शुरू करने की क्षमता, कम खर्च में शिक्षा – आर्थिक रूप से सुलभ।
सरकार के प्रयास भारत सरकार और राज्य सरकारें कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ चला रही हैं, जैसे: Skill India Mission, PMKVY (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना), Apprenticeship Training Scheme (ATS), Dual System of Training। इन योजनाओं के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण, प्रमाणपत्र और रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
ITI में प्रमुख पाठ्यक्रम और नई तकनीक आज ITI केवल पारंपरिक ट्रेड तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीकों को भी शामिल किया गया है: Electrician, Fitter, Welder, Mechanic (Motor Vehicle), Refrigeration & Air Conditioning, Computer Operator & Programming Assistant (COPA), Solar Technician, CNC Machine Operator नई तकनीकों जैसे Automation, Renewable Energy, Electric Vehicles (EV) आदि पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कौशल ही असली शक्ति है: आज का युवा यदि केवल सरकारी नौकरी के पीछे भागेगा, तो अवसर सीमित रहेंगे। लेकिन यदि वह ITI जैसे कौशल आधारित प्रशिक्षण को अपनाता है, तो उसके सामने अनंत संभावनाएँ खुल जाती हैं। ITI केवल एक कोर्स नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का मार्ग है। यह युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाता है। यदि हम बेरोजगारी को कम करना चाहते हैं, देश की उत्पादकता बढ़ाना चाहते हैं, और GDP को ऊँचाई पर ले जाना चाहते हैं, तो हमें कौशल विकास को प्राथमिकता देनी होगी।