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Research & Publication Published on September 28, 2026

कौशल से स्टार्टअप तक: ITI प्रशिक्षुओं के लिए स्वरोजगार क्यों है बेहतर विकल्प By H L Sharma

HEERA LAL SHARMA
HEERA LAL SHARMA
Verified PATF Member / Educator
कौशल से स्टार्टअप तक: ITI प्रशिक्षुओं के लिए स्वरोजगार क्यों है बेहतर विकल्प By H L Sharma

कौशल से स्टार्टअप तक: ITI प्रशिक्षुओं के लिए स्वरोजगार क्यों है बेहतर विकल्प

By H L Sharma

वर्तमान समय में बेरोजगारी देश के सामने एक गंभीर चुनौती के रूप में उभर रही है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद अनेक युवा रोजगार पाने में असफल हो रहे हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ कौशल आधारित शिक्षा को भी समान महत्व दिया जाए। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) इसी दिशा में युवाओं के लिए एक प्रभावी माध्यम के रूप में सामने आया है, जो उन्हें स्वरोजगार की ओर प्रेरित करता है।

ITI का उद्देश्य केवल तकनीकी ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि युवाओं को व्यावहारिक रूप से सक्षम बनाना है। इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर, प्लंबर, मैकेनिक तथा Refrigeration & Air Conditioning (RAC) जैसे ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर युवा आसानी से अपने कार्य की शुरुआत कर सकते हैं। वे घर-घर जाकर सेवाएं प्रदान कर सकते हैं या स्वयं का छोटा वर्कशॉप स्थापित कर अपना व्यवसाय प्रारंभ कर सकते हैं। इस प्रकार ITI प्रशिक्षु नौकरी की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं रोजगार के अवसर सृजित कर सकते हैं।

वैश्विक स्तर पर भी कुशल श्रमिकों की मांग निरंतर बढ़ रही है। विकसित देशों में तकनीकी कामगारों की कमी के कारण ITI प्रशिक्षित युवाओं के लिए विदेशों में भी रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। भारत में Skill India Mission के अंतर्गत युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकार द्वारा स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। Pradhan Mantri Employment Generation Programme (PMEGP) के तहत युवाओं को व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। Pradhan Mantri Mudra Yojana के माध्यम से बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराया जाता है। Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana के अंतर्गत निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि Startup India और Digital India जैसी पहलें नए उद्यमियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करती हैं। इन योजनाओं का लाभ उठाकर ITI प्रशिक्षु अपने व्यवसाय की सशक्त नींव रख सकते हैं।

स्वरोजगार के अनेक लाभ हैं। इससे युवा स्वयं के स्वामी बनते हैं, उनकी आय की कोई निश्चित सीमा नहीं होती, और वे अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कर सकते हैं। इसके साथ ही यह उनके आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास को भी सुदृढ़ करता है। छोटे स्तर से प्रारंभ किया गया कार्य समय के साथ एक बड़े उद्यम का रूप ले सकता है।

हालांकि, सफलता प्राप्त करने के लिए युवाओं को अपने कौशल को निरंतर उन्नत करना, बाजार की मांग को समझना और ग्राहकों के साथ सकारात्मक व्यवहार बनाए रखना आवश्यक है। आधुनिक समय में डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया का उपयोग कर अपने कार्य का प्रभावी प्रचार-प्रसार भी किया जा सकता है।

निष्कर्षतः, ITI आज के युवाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का एक सशक्त माध्यम है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि युवा अपने कौशल को पहचानें और उसे सही दिशा में उपयोग करें।

“समय की मांग है—नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनें।”

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