विज्ञान के पथप्रदर्शक: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षक श्री एच. पी. भुंडिया की प्रेरक गाथा
"शिक्षा केवल किताबी ज्ञान देने का साधन नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवीन सोच (Innovative Mindset) का बीजारोपण करने का एक पवित्र यज्ञ है।"
इस विचार को अपने जीवन का परम लक्ष्य बनाकर पिछले ढाई दशकों से भी अधिक समय से शिक्षा के क्षेत्र में विज्ञान की अलख जगा रहे व्यक्तित्व का नाम है श्री हेशितकुमार प्रवीणचंद्र भुंडिया (एच. पी. भुंडिया)।
करियर की शुरुआत और प्रथम चरण (1997 - 2002)
श्री एच. पी. भुंडिया की शैक्षणिक और वैज्ञानिक यात्रा की शुरुआत वर्ष १९९७ में राजकोट स्थित 'रिजनल कम्युनिटी साइंस सेंटर' में 'जूनियर साइंटिस्ट' के रूप में हुई थी। कक्षा की चार दीवारों से बाहर निकलकर बच्चे विज्ञान को स्वयं अनुभव करें, इसके लिए उन्होंने 'विज्ञान सफर', 'विज्ञान दर्शन' और 'संडे साइंस स्कूल' जैसी 'हैंड्स-ऑन' (Hands-on) विज्ञान पहलों का सफल नेतृत्व किया।
समाज के विभिन्न वर्गाें तक विज्ञान पहुँचाने के लिए उन्होंने कई प्रकाशनों और पत्रिकाओं का संपादन किया:
- पत्रिकाएँ: दूरदराज के स्कूलों के लिए 'विज्ञान जागृति' और 'ई-रसायनम'।
- रसोई प्रयोग पोथी: घरेलू पद्धति से खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावट की जाँच करने वाली सरल मार्गदर्शिका।
- Electron - 100: हॉबी किट्स के लिए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट सर्किट दर्शाने वाली उपयोगी पुस्तक।
- भूकंप पत्रिका: प्राकृतिक आपदाओं के प्रति वैज्ञानिक जानकारी और सावधानी बरतने संबंधी मार्गदर्शिका।
सामाजिक उत्तरदायित्व और राहत कार्य
विज्ञान का उपयोग समाज सेवा के लिए करने की भावना के साथ उन्होंने 2001 में राजकोट में पानी की किल्लत दूर करने के लिए 'घरनु पानी घरमा' (वर्षा जल संचयन - Rainwater Harvesting) जन-जागृति अभियान चलाया। 2001 के कच्छ भूकंप के दौरान अंजार में संकट के समय राहत कार्य किए और कक्षा 10 के बोर्ड विद्यार्थियों को शैक्षणिक सहायता प्रदान की।
इसके बाद 2002 में अहमदाबाद के 'सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल एजुकेशन' (CEE) में प्रोजेक्ट ऑफिसर के रूप में 'आनंद शाला प्रोजेक्ट' के तहत डांग जिले के लगभग 10 दूरदराज के स्कूलों के शैक्षणिक और बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया।
स्वामीनारायण गुरुकुल और विज्ञान क्रांति (२००२ से वर्तमान)
वर्ष 2002 से वे राजकोट की 'श्री स्वामीनारायण गुरुकुल विद्यालय' में विज्ञान शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे हैं। यह संस्था मात्र ₹360 वार्षिक जैसी अत्यंत मामूली फीस में ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के मेधावी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आवास और पौष्टिक भोजन प्रदान करती है, ताकि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न रहे।
ATL लैब और इनोवेशन मॉडल
शिक्षा को व्यावहारिक और अनुसंधान-आधारित बनाने के लिए उन्होंने २०१८ में भारत सरकार के 'नीति आयोग' (NITI Aayog) से ₹२०,००,००० की ग्रांट प्राप्त कर स्कूल में 'ATL लैब' (अटल टिंकरिंग लैब) की स्थापना की। ATL और इको-क्लब के फैसिलिटेटर के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों को रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीकों की ओर अग्रसर किया।
विद्यार्थियों की उपलब्धियाँ और मार्गदर्शन
श्री एच. पी. भुंडिया के कुशल मार्गदर्शन में गुरुकुल के विद्यार्थियों ने देश और दुनिया में नाम रोशन किया है:
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर: विद्यार्थियों ने अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान मेले में ६ बार भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
- राष्ट्रीय स्तर पर: राष्ट्रीय विज्ञान मेले में ११ बार गुजरात का और राज्य स्तरीय प्रदर्शनियों में ६ बार राजकोट का प्रतिनिधित्व किया है।
- प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में विजय: 'वर्ल्स बिगेस्ट रोबोटिक ओलंपियाड-२०२२', 'ATL मैराथन-२०२०', 'इंडियन फ्यूचर टाइकून-२०२३', 'वल्र्ड STEM रोबोटिक ओलंपियाड-२०२४' और 'वल्र्ड STEM रोबोटिक ओलंपियाड-२०२६' जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर 3D प्रिंटर्स, लैपटॉप, टैबलेट और स्मार्ट वॉच जैसे पुरस्कार जीते हैं।
- रिसर्च पेटेंट: उनके मार्गदर्शन में एक विद्यार्थी ने कपास कातने की मशीन के प्रोटोटाइप के लिए 'शोध पेटेंट' (Research Patent) हासिल करने की अद्भुत उपलब्धि प्राप्त की है।
प्रायोगिक शिक्षा और व्यक्तिगत अनुसंधान
- 100% परिणाम और नवीन पद्धतियाँ: कक्षा ९ और १० के विज्ञान के जटिल विषयों को सरल बनाने के लिए उन्होंने इंटरैक्टिव वैज्ञानिक खेलों और प्रायोगिक गतिविधियों (hands-on experiments) की शुरुआत की, जिसके परिणामस्वरूप स्कूल के बच्चे विज्ञान विषय में लगातार १००% परिणाम प्राप्त कर रहे हैं।
- कोविड-19 महामारी के दौरान सेवा: इस अवधि के दौरान GSEB (गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) के विज्ञान सलाहकार के रूप में सेवा दी तथा शिक्षा प्रक्रिया को निरंतर रखने के लिए मुफ्त एनिमेटेड यूट्यूब वीडियो और इंटरैक्टिव प्रस्तुतियाँ तैयार कीं।
- पारिवारिक अनुसंधान (पेटेंट): व्यक्तिगत स्तर पर अपनी बेटी अमी और बेटे दीप के साथ मिलकर घरेलू 'अल्कालाइन वॉटर फिल्ट्रेशन सिस्टम' विकसित की, जिसके लिए मार्च 2024 में शोध पेटेंट (Research Patent) प्राप्त हुआ।
मुख्य पुरस्कार और सम्मान
उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक सेवाओं के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और राज्य स्तर के पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है:
- राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (National Teacher Award) 2025
- राज्य शिक्षक पुरस्कार (State Teacher Award) 2024
- श्री एस. सी. श्रॉफ टीचर अवार्ड 2025
- स्किलप्रिंट साइंस एक्सीलेंस अवार्ड 2024
- जिला शिक्षक पुरस्कार (District Teacher Award) 2023
- नेशन बिल्डर अवार्ड 2022